कहते हैं इतिहास न बोलो, कह दो फिक्शन की बुनाई है कहते हैं इतिहास न बोलो, कह दो फिक्शन की बुनाई है
ऋग्वेद न जानती हूँ और क्या लिखूँ एक एक शब्द ढूंढ कर सोचती क्या लिखूँ। ऋग्वेद न जानती हूँ और क्या लिखूँ एक एक शब्द ढूंढ कर सोचती क्या लिखूँ।
चल नहीं रहा यहाँ चलन दीनार देखा हमने ऐतिहासिक चार मीनार चल नहीं रहा यहाँ चलन दीनार देखा हमने ऐतिहासिक चार मीनार
जज़्बात एक्सप्रेस कथा जज़्बात एक्सप्रेस कथा
वो सर से पाँव तक पूरी इशारा। वो सर से पाँव तक पूरी इशारा।
इतने लालों की माई मैं, क्यों इतनी असहाय पड़ी। इतने लालों की माई मैं, क्यों इतनी असहाय पड़ी।